Holy scriptures

Tuesday, 23 June 2020

गुरू पूर्णिमा


  • गुरु पूर्णिमा सपेशल

        गुरु के बिना जीवन कुछ भी संभव नहीं है
          जन्म से लेकर मृत्यु तक गुरु की आवश्यक होती हैं
              गुरु के बिना जीवन अधूरा और दिशाहीन है।
कभी सड़क पर रहने वाले उन बच्चों का जीवन देखिए जिनका कोई गुरू नहीं होता। उन्हें न तो शिक्षा मिलती है ना ही संस्कार। जिस तरह मां बाप के बिना बच्चा अनाथ होता है उसी तरह गुरु के बिना शिष्य।
जैसे सूर्य अंधकार को चीरकर उजियारा कर देता है उसी समान गुरू दीपक की भांति शिष्य के जीवन को ज्ञान रूपी प्रकाश से भर देता है।

            लेकिन सच्चा गुरु वहीं है जो भवसागर पार उतार दे

भले इस शिक्षा ने हमें चांद तक पहुंचा दिया है परंतु इसने हमें इतना स्वार्थी, धूर्त एवं लोभी भी बना दिया है कि आज हम वास्तविक परमात्मा के अस्तित्व में भी मीन-मेख ढूंढ लेते हैं। परंतु इसी शिक्षा को यदि हम अपने आत्म कल्याण के लिए प्रयोग करेंगे तो हमें परमात्मा प्राप्ति तो होगी ही जीवन में हर वह सुख मिलेगा जिसके लिए हम उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं।

कहीं आपका गुरु नकली तो नहीं
गुरू गुरू में भेद होता है
कबीर, सात द्वीप नौ खण्ड में, गुरु से बड़ा ना कोय। करता करे ना कर सकै, गुरु करे सो होय।।

सतगुरु भक्ति मुक्ति के दानी, सतगुरु बिना न छूटै खानी। सतगुरु भक्ति कराकर मुक्ति प्रदान करते हैं। वे भक्ति तथा मुक्ति के दाता हैं। सतगुरु के बिना चार खानी (अण्डज, जेरज, उद्भज, श्वेतज, ये चार खानी हैं, इनमें जन्म-मरण होता है।) का यह चक्र कभी नहीं छुटता। (1) अण्डजः- जो प्राणी अण्डे से उत्पन्न होते हैं जैसे पक्षी, इसको अण्डज खानी कहते हैं। (2) जेरजः- जो जेर से उत्पन्न होते हैं, जैसे मानव तथा पशु। (3) उद्भजः- जो स्वयं उत्पन्न होते हैं, जैसे गेहूं में सरसी, ढ़ोरा तथा किसी पदार्थ के खट्टा होने पर उसमें कीड़े उत्पन्न होना, उद्भज खानी है। (4) श्वेतजः- जो पसीने से उत्पन्न होते हैं जैसे मानव शरीर या पशु के शरीर में ढ़ेरे, जूम, चिचड़ आदि ये श्वेतज खानी कहलाती है। इस प्रकार चार खानी से जीव उत्पन्न होते हैं जो कुल 84 लाख प्रकार की योनि अर्थात् शरीर का जीव धारण करते हैं और जन्मते-मरते हैं। यह चार खानी का संकट सतगुरु बिना नहीं मिट (समाप्त हो) सकता। जहां शिक्षक ( गुरु) आपको शिक्षा का महत्व समझा कर पाठ पढ़ाता है तो सदगुरु आपको परमात्म ज्ञान देकर सभी बंधनों से छुड़वाता है जिसे सदगुरू बंदी छोड़ भी कहते हैं। इस समय धरती पर संत रामपाल जी महाराज बंदीछोड़ कबीर जी के अवतार रूप में मौजूद हैं। संत रामपाल जी से नाम दीक्षा लेकर और सतभक्ति करके आप सभी बंधनों से मुक्त हो सकते हैं।

  • अधिक जानकारी हेतु गुरु पूर्णिमा पर खास विडिओ देखें

https://youtu.be/fPGzUfybnb0
Or 
www. supremeGod.com

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