Wednesday, 5 August 2020

गणेश चतुर्थी

Sri Ganesh chaturthi special'

चतुर्थी कोे गणेश जी के जन्मदिन और त्यौहार के रूप में देश और विदेश दोनों में मनाया जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार भद्रा (मध्य अगस्त से मध्य सितंबर) में यह त्यौहार रूप में 10 दिनों तक मनाया जाता है और यह अनंत चतुर्दशी पर समाप्त होता है।
गणेश जी भगवान शिव और देवी पार्वती के छोटे पुत्र हैं। भगवान गणेश को 108 विभिन्न नामों से भी जाना जाता है। व्यापक रूप से इन्हें गणपति या विनायक के रूप में जाना जाता है।


कैसे हुई गणेश जी की उत्पत्ति?
शिवपुराण की कथानुसार शिव के अनेक गण थे जो उनकी आज्ञा का पालन करते थे। परंतु पार्वती जी का कोई गण नहीं था। इसी पीड़ा से क्षुब्ध पार्वती ने अपने शरीर पर लगाए उबटन की मैल से एक पुतला बनाया और उसमें प्राण डाल दिए।
गजानन नहीं है मोक्षदाता!
वर्तमान में गणेश की जिस तरह से पूजा अर्चना की जा रही है यह भक्त को सात जन्मों में भी लाभ व मोक्ष नहीं दे सकती। साधक सदा जन्म मरण के चक्कर काटता रहता है। किसी भी भगवान को ईष्ट मानकर भक्ति करने से साधक मृत्यु उपरांत कुछ समय के लिए भले ही इन भगवानों के लोक में गण या स्थान प्राप्त कर सकता है परंतु उसे भोगने के बाद उसे फिर से स्वर्ग नरक और पृथ्वी के चक्कर लगाने से कदापि मुक्ति नहीं मिलती।
साधक या भक्त जिस भी भगवान को अपना इष्टदेव मानकर मंत्र जाप करते हैं वे उसी के लोक में चले जाते हैं। जैसे विष्णु का साधक विष्णु लोक में, शिव का साधक शिव लोक में, ब्रह्मा का साधक ब्रह्मा लोक में, काल ब्रह्म का साधक ब्रह्मलोक में चला जाता है। गीता अ. 9 के श्लोक 25-26 और अ.8 के श्लोक 8-9-10 में लिखा है जो जिसकी भक्ति करता है उसी के लोक में चला जाता है। गीता अ. 9 के श्लोक 20 और 21 में लिखा है साधक जन दिव्य स्वर्ग को भोगकर फिर मुत्युलोक में आते हैं। यानि मुक्ति नहीं मिलती।
वर्तमान में गणेश जी की जिस तरह से भक्ति समाज में की जा रही है इससे समाज को और करने वाले साधक को राई के दाने जितना लाभ भी नहीं हो सकता। मनचाही मूर्ति बाज़ार से लाकर दस दिन तक पूजा और भोग लगाकर दसवें दिन जलप्रवाह करने से पानी में रहने वाले जीव मूर्ति में इस्तेमाल हुए ज़हरीले रंगों के दुषप्रभाव से मर जाते हैं। प्रत्येक वर्ष गणेश चतुर्थी के विसर्जन के दौरान लाखों लोग दुर्घटना के शिकार होते हैं। ढोल नगाड़े बजाकर गणेश जी की मूर्ति को घर लाया और बहाया जाता है। ऐसी पूजा विधि करने का आदेश तो किसी भी प्रकार के पुराण में या ग्रंथ में लिखित नहीं है।
सही भक्ति विधि जानने और प्राप्त करने के लिए तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज द्वारा लिखित पुस्तक ज्ञान गंगा पढ़िए जो सब वेदों का सार है।
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और देखे रोज़ साधान
 टीवी पर प्रसारित संत रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन ।

Tuesday, 14 July 2020

मानव जीवन

मानवता से जो पूर्ण हो, वही मनुष्य कहलाता

बिन मानवता के मानव भी, पशुतुल्य रह  जाता है
: मानव जीवन का लक्ष्य है समग्रता से खिलना, खुलना और खेलना यानी अपनी उच्चतम संभावना को खोलना। ... उसी तरह समग्रता से जीकर सारे संसार के लिए निमित्त बनना ही मानव जीवन का मूल लक्ष्य है। इस संसार में रहकर हरेक को पूर्णता से खुलकर, खिलकर, वह करना है जो वह कर सकता है। मानव जीवन के लक्ष्य के बारे में आज तक लोगों की यही धारणा रही है कि भरपूर धन-दौलत, नाम-शोहरत, मान-इ़ज़्ज़त कमाने में ही मानव जीवन की सार्थकता है। लोगों से यह ग़लती हो जाती है कि वे पैसे को ही अपना लक्ष्य बना लेते हैं। पैसा सुविधा है, मज़बूत रास्ता है मगर मंज़िल नहीं। स़िर्फ करियर बनाना, पैसे इकट्ठे करना, शादी करना, बच्चे पैदा करना, उन बच्चों का करियर बनाना, उनके बच्चों का पालन-पोषण करके मर जाना ही मानव जीवन का लक्ष्य नहीं है।जीवन का मूल लक्ष्य है स्वयं जीवन को जाने, जीवन अपनी वास्तविकता को प्राप्त होें, स्वअनुभव करे’। यानी जीवन का लक्ष्य है वह स्वअनुभव प्राप्त करना, जिसे आज तक अलग-अलग नामों से जाना गया है, जैसे साक्षी, स्वसाक्षी, अल्लाह, ईश्वर, चैतन्य इत्यादि। वही ज़िंदा चैतन्य हमारे अंदर है, जिस वजह से हमारा शरीर चल रहा है, बोल रहा है, देख रहा है, अलग-अलग तरह की अभिव्यक्ति कर रहा है वरना शरीर तो केवल शव है। हमारे अंदर जो शिव है, वही ज़िंदा तत्व जीवन है, जिसे पाने को ही मानव जीवन का मूल लक्ष्य कहना चाहिए। जब इंसान के शरीर में जीवन अपनी वास्तविकता को प्राप्त होता है, तब उसे आत्मसाक्षात्कार कहते हैं।


मानव जीवन में दीक्षा कितनी जरूरी ?
“जब तक पूर्ण गुरु का सत्संग सुनने को नहीं मिलता तब तक इस बात का अंदाजा ही नहीं लगता कि मनुष्य जीवन कितना कीमती है ।“

चाहे आप कितने भी धनी पुरुष हो, गोरखनाथ जी जैसे सिद्ध पुरुष हो, अनगिनत कलाओं के स्वामी हो,  समाज में मान-सम्मान प्राप्त शख्सीयत हो, चाहे इस पृथ्वी के राजा भी क्यों न हो, अगर गुरु दीक्षा नही ली है तो स्वर्ग में भी स्थान नहीं मिलता। इस संबंध में सुखदेव मुनि की कथा प्रमाणित है

कबीर साहेब कहते हैं ।

गुरु बिन माला फेरते,गुरु बिन देते दान।
गुरु बिन दोनों निष्फल है, चाहे पूछ लो वेद पुराण।।
और अधिक जानकारी के लिए देखें साधना टीवी पर प्रसारित साम 7.30पीएम पर।
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Tuesday, 7 July 2020

सावन सोमवार 2020

Sawan somvar
    Sawan Somvar 2020 Hindi: आज पाठक गण जानेंगे सावन के पावन महीने या Sawan Ka Pahala Somvar के पूजा पाठ, कर्मकांड और तैयारियों के बारे में और जानेंगे सनातन संस्कृति में मास, तिथि, वार और यह महीना भोलेनाथ को समर्पित क्यों होता है? क्या क्या Om namah shivay से या हर हर  महादेव से मुक्ति संभव है
     
जानिए Sawan Somvar 2020 के बारे में विस्तृत व वास्तविक जानकरी, जैसे क्या Om Namah Shivay या हर हर महादेव Mantra के जाप से मोक्ष संभव है?, क्या Vrat करना श्री भगवत गीता जी के अनुसार सही है या इससे मुक्ति संभव है?
हिन्दू पंचांग के अनुसार श्रावण मास पांचवा महीना होता है
संयोग से यह श्रावण महीना सोमवार से शुरू होकर सोमवार को ही समाप्त
6 जुलाई 2020 (पहला सोमवार) से लेकर 3 अगस्त 2020 (पाँचवा सोमवार) तक
हर सोमवार को शिवलिंग पर होगा जलाभिषेक और श्रद्धालु रखेंगे व्रत
देवी पार्वती ने इस महीने में की थी भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या
शिवजी ने सावन के महीने में ही किया था विषपान
इंद्र ने वर्षा की थी कैलाश पति को विष की गर्मी से छुटकारा दिलवाने के लिए
कहते है इसी कारण श्रावण मास में उत्तम वृष्टि के योग बनते हैं
कबीर साहेब कहते हैं तीन देव की जो करते भक्ति, उनकी कभी न होवे मुक्ति
आखिर भगवान शिव को Sawan का महीना क्यों प्रिय है?
भगवान शिव को सावन का महीना बहुत प्रिय है। शास्त्रों में बताया गया है कि जो भी भक्त सच्चे मन से सावन के महीने में शिवजी की पूजा करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और शुभ फल भी प्राप्त होते हैं। इस बार सावन में 5 सोमवार हैं और हर सोमवार पर अद्भुत योग बन रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सावन के महीने में ही भगवान शिव की पूजा क्यों होती है, आखिर भगवान शिव को यह महीना क्यों प्रिय है? आइए जानते हैं इन सभी प्रश्नों के उत्तर ।
यह बात श्रद्धालुओ को ऐसी लगेगी जैसे गलत बोला जा रहा है लेकिन बात यह सत्य है कि केवल शिव पूजा से मोक्ष नहीं मिलता, क्योंकि शिवजी की आराधना ही मोक्ष का आधार नहीं है ।

■ श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार

अध्याय 3 के श्लोक 9 में कहा है कि निष्काम भाव से शास्त्र अनुकूल किये हुए धार्मिक कर्म ( यज्ञ ) लाभ दायक है।
अध्याय 3 के श्लोक 6 से 9 में एक स्थान पर आँख बंद करके बैठ कर हठ योग करने को या समाधि लगाने को बिल्कुल मना किया है । कहा है कि शास्त्र अनुकूल भक्ति साधना करना ही लाभदायक है ।
अध्याय 8 के श्लोक 16 व अध्याय 9 का श्लोक 7 में बताया है कि ब्रह्म लोक से लेकर ब्रह्मा, विष्णु और शिवजी आदि के लोक और ये स्वयं भी जन्म मरण व प्रलय में है । इसलिए ये अविनाशी नहीं हैं । जब ये अविनाशी नहीं है तो इनके उपासक भी जन्म मरण में ही हैं ।
देवी देवताओं व तीनों गुणों (ब्रह्मा, विष्णु, शिव) की पूजा करना तथा भूत पूजा, पितर पूजा, यह सब व्यर्थ की साधना है इन्हें करने वालों को घोर नरक में जाना पड़ेगा । अध्याय 7 का श्लोक 12 से 15 तथा 20 से 23 व अध्याय 9 के श्लोक 25 में यह प्रमाण है ।
व्रत करने से भक्ति असफल है। योग न तो बहुत अधिक खाने वाले का और बिल्कुल न खाने वाले का सिद्ध नहीं होता। अध्याय 6 के श्लोक 16 में प्रमाण है ।
जो शास्त्र अनुकूल यज्ञ हवन आदि पूर्ण गुरु के माध्यम से नहीं करते उन्हे लाभ नहीं होता। अध्याय 3 के श्लोक 12 में प्रमाण है
ब्रह्म (काल – क्षर पुरुष) सदाशिव की उत्पत्ति अविनाशी (पूर्ण ब्रह्म) परमात्मा से हुई है । अध्याय 3 के श्लोक 14 व 15 में प्रमाण है।
भगवान तीन हैं:- क्षर (ब्रह्म) पुरुष, अक्षर पुरुष (परब्रह्म) और परम अक्षर पुरुष (पूर्ण ब्रह्म) । अध्याय 15 के श्लोक 16,17 व 18 में प्रमाण है।
जिनमें से मोक्ष केवल पूर्ण ब्रह्म की भक्ति साधना से ही मिल सकता है । फिर हम कैसे कह सकते है कि केवल शिव जी की भक्ति साधना करने से पूर्ण लाभ मिल सकता है ।
पूर्ण मोक्ष के अभिलाषी भक्तजन कैसे भक्ति करें?
इस मास में जो भी पूजा साधना की जा रही है वह बिल्कुल भी शास्त्र अनुकूल भक्ति विधि नहीं है। शास्त्रों के अनुसार भक्ति विधि केवल तत्वदर्शी संत ही बता सकते है ।

प्रमाण है गीता जी का अध्याय 15 के श्लोक 1 से 4 व 16 , 17 में ।

आध्यत्मिक ज्ञान ही मोक्ष का सार है । यह ज्ञान वर्तमान में केवल तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के पास है उनका ज्ञान सुनें और समझें । सभी साधन उपलब्ध है और पढ़े लिखे भक्त वेदों पुराणों और अन्य शास्त्रों से मिलान भी कर सकते हैं । यह मानव जन्म बार बार नहीं मिलता है अतः लख चौरासी से बाहर जाने के लिए मोक्ष मार्ग का चयन ध्यान पूर्वक करें ।

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Wednesday, 1 July 2020

Happy Deepawali

     दीपावली
दिवाली का त्यौहार क्यों मनाया जाता है, दिवाली मनाने की ख़ुशी के पीछे क्या कारण हैं, क्या सच में हमें दीपावली की खुशियाँ मनाई जानी चाहिए और दिवाली 2018 के त्यौहार के कारण क्या है?




       :दीपावली  दुनिया भर में हिंदुओं के सबसे प्रसिद्ध त्योहारों में से एक है। यह त्यौहार भगवान राम (जो भगवान का अवतार था) की याद में मनाया जाता है।
   यह हिंदू महीने कार्तिक के 15 वें दिन मनाया जाता हैं
    दिवाली  के जश्न के पीछे की कहानी त्रेता युग में, अयोध्या के भगवान राम  रावण के साथ लड़े और 14 साल के वनवास के दौरान सीता माता को वापस ले गए।
         

दिवाली को "प्रकाशोत्सव" कहा जाता है क्योंकि लोग अपने घरों को मिट्टी के दीयों से रोशन करते हैं। 

लेकिन आज के समय में दीवाली की(तैयारी) में पटाखे, धुआं, शोर और प्रदूषण के साथ। लोग अपने घरों को रोशन करने और मिठाई खरीदने के बजाय
उनका परिवार, पटाखे खरीदने में बहुत पैसा खर्च करता है, जिससे न केवल शोर होता है, बल्कि बहुत धुआं भी निकलता है
यदि लोग वेदों और भगवद् गीता में वर्णित पूजा के सही तरीके का अभ्यास करना शुरू कर दें तो ही यह दुनिया चलेगी।
स्वचालित रूप से अधिक शांतिपूर्ण और निर्मल होने लगते हैं। लेकिन, लोगों को यह कैसे पता चलेगा कि वेदों में क्या लिखा है औरभगवद् गीता के रूप में यह एक समय लेने वाली गतिविधि है, और किसी के पास उन्हें पढ़ने का समय नहीं है? इसका उत्तर बहुत सरल है, बस संत रामपाल जी महाराज के प्रवचनों को सुनें, रोज शाम 7.30बजे साधना चेन्नल पर
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Tuesday, 23 June 2020

Janmashtami: lord Krishna

Krishna Janmashtami kyaa hai
Krishna Janmashtami

गुरू पूर्णिमा


  • गुरु पूर्णिमा सपेशल

        गुरु के बिना जीवन कुछ भी संभव नहीं है
          जन्म से लेकर मृत्यु तक गुरु की आवश्यक होती हैं
              गुरु के बिना जीवन अधूरा और दिशाहीन है।
कभी सड़क पर रहने वाले उन बच्चों का जीवन देखिए जिनका कोई गुरू नहीं होता। उन्हें न तो शिक्षा मिलती है ना ही संस्कार। जिस तरह मां बाप के बिना बच्चा अनाथ होता है उसी तरह गुरु के बिना शिष्य।
जैसे सूर्य अंधकार को चीरकर उजियारा कर देता है उसी समान गुरू दीपक की भांति शिष्य के जीवन को ज्ञान रूपी प्रकाश से भर देता है।

            लेकिन सच्चा गुरु वहीं है जो भवसागर पार उतार दे

भले इस शिक्षा ने हमें चांद तक पहुंचा दिया है परंतु इसने हमें इतना स्वार्थी, धूर्त एवं लोभी भी बना दिया है कि आज हम वास्तविक परमात्मा के अस्तित्व में भी मीन-मेख ढूंढ लेते हैं। परंतु इसी शिक्षा को यदि हम अपने आत्म कल्याण के लिए प्रयोग करेंगे तो हमें परमात्मा प्राप्ति तो होगी ही जीवन में हर वह सुख मिलेगा जिसके लिए हम उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं।

कहीं आपका गुरु नकली तो नहीं
गुरू गुरू में भेद होता है
कबीर, सात द्वीप नौ खण्ड में, गुरु से बड़ा ना कोय। करता करे ना कर सकै, गुरु करे सो होय।।

सतगुरु भक्ति मुक्ति के दानी, सतगुरु बिना न छूटै खानी। सतगुरु भक्ति कराकर मुक्ति प्रदान करते हैं। वे भक्ति तथा मुक्ति के दाता हैं। सतगुरु के बिना चार खानी (अण्डज, जेरज, उद्भज, श्वेतज, ये चार खानी हैं, इनमें जन्म-मरण होता है।) का यह चक्र कभी नहीं छुटता। (1) अण्डजः- जो प्राणी अण्डे से उत्पन्न होते हैं जैसे पक्षी, इसको अण्डज खानी कहते हैं। (2) जेरजः- जो जेर से उत्पन्न होते हैं, जैसे मानव तथा पशु। (3) उद्भजः- जो स्वयं उत्पन्न होते हैं, जैसे गेहूं में सरसी, ढ़ोरा तथा किसी पदार्थ के खट्टा होने पर उसमें कीड़े उत्पन्न होना, उद्भज खानी है। (4) श्वेतजः- जो पसीने से उत्पन्न होते हैं जैसे मानव शरीर या पशु के शरीर में ढ़ेरे, जूम, चिचड़ आदि ये श्वेतज खानी कहलाती है। इस प्रकार चार खानी से जीव उत्पन्न होते हैं जो कुल 84 लाख प्रकार की योनि अर्थात् शरीर का जीव धारण करते हैं और जन्मते-मरते हैं। यह चार खानी का संकट सतगुरु बिना नहीं मिट (समाप्त हो) सकता। जहां शिक्षक ( गुरु) आपको शिक्षा का महत्व समझा कर पाठ पढ़ाता है तो सदगुरु आपको परमात्म ज्ञान देकर सभी बंधनों से छुड़वाता है जिसे सदगुरू बंदी छोड़ भी कहते हैं। इस समय धरती पर संत रामपाल जी महाराज बंदीछोड़ कबीर जी के अवतार रूप में मौजूद हैं। संत रामपाल जी से नाम दीक्षा लेकर और सतभक्ति करके आप सभी बंधनों से मुक्त हो सकते हैं।

  • अधिक जानकारी हेतु गुरु पूर्णिमा पर खास विडिओ देखें

https://youtu.be/fPGzUfybnb0
Or 
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Wednesday, 17 June 2020

Hare Krishna


Janmashtami special
कृष्ण जी केवल नसीब में लिखा होता है वहीं दे सकते हैं
और
पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी जीवन रेखा को भी बढ़ा सकते है जैसे 👇👇🙏🏻
 कृष्ण जी ने एक मुट्ठी चावल के बदले सुदामा का महल बनाया
और 
परमेश्वर कबीर साहेब जी ने एक रोटी के बदले
तेमुरलेंग को सात पीढ़ी का राज दे दिया l


क्या
तीन लोक के भगवान कृष्ण जी के ऊपर भी कोई सक्ती है
अधिक जानकारी के लिए देखें साधना चैनल पर शाम 7:30 बजे संत रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन
                     Must visit 👇👇👇🙏🏻
               
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गणेश चतुर्थी

Sri Ganesh chaturthi special' चतुर्थी कोे गणेश जी के जन्मदिन और त्यौहार के रूप में देश और विदेश दोनों में मनाया जाता है। हिंदू कैलेंडर क...